Showing posts with label सीबीआई. Show all posts
Showing posts with label सीबीआई. Show all posts

Saturday, July 15, 2017

राजनीति नहीं चाहती सीबीआई को स्वतंत्र बनाना

इस साल मई में लालू यादव के पारिवारिक ठिकानों पर जब सीबीआई की छापा-मारी हुई तो लालू यादव ने ट्वीट किया,बीजेपी में हिम्मत नहीं कि लालू की आवाज को दबा सकेलालू की आवाज दबाएंगे तो देशभर में करोड़ों लालू खड़े हो जाएंगे। यह राजनीतिक बयान था। उन छापों के बाद यह भी समझ में आने लगा कि लालू और नीतीश कुमार के बीच खलिश काफी बढ़ चुकी है। छापों की खबर आते ही लालू ने अपने ट्वीट में एक ऐसी बात लिखी जिसका इशारा नीतीश कुमार की तरफ़ था। उन्होंने लिखा, बीजेपी को उसका नया एलायंस पार्टनर मुबारक हो। बात का बतंगड़ बनने के पहले ही लालू ने बात बदल दी। उन्होंने कहा बीजेपी के पार्टनर माने आयकर विभाग और सीबीआई।

लालू ने एक तीर से दो शिकार कर लिए। वे जो कहना चाहते थे, वह हो गया। उधर नीतीश कुमार ने कहा, बीजेपी जो आरोप लगा रही है, उसमें सच्चाई है तो केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों से जांच या कार्रवाई क्यों नहीं कराती? पिछले साल नवंबर में नोटबंदी का नीतीश कुमार ने स्वागत किया था। उसके साथ उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री को बेनामी संपत्ति के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई करनी चाहिए। लालू यादव के परिवार की जिस सम्पत्ति को सीबीआई ने छापे डाले हैं, उसका मामला नीतीश की पार्टी ने ही सन 2008 में उठाया था। तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। आज बीजेपी सरकार है और बेनामी सम्पत्ति कानून में बदलाव हो चुका है। लालू की बड़ी बेटी मीसा भारती और उनके पति इन दिनों सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के घेरे में हैं।

Sunday, May 12, 2013

आज़ादी चाहता है ‘पिंजरे में कैद तोता’


सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सरकार के पिंजड़े में कैद तोता ही नहीं बताया, उसकी आज़ादी का रास्ता भी साफ कर दिया है। रेलमंत्री पवन कुमार बंसल और कानून मंत्री अश्विनी कुमार को हटा दिया गया है। 

मंत्रियों का रहना या हटना मूल समस्या नहीं है। समस्या का लक्षण है। इन दोनों मंत्रियों के साथ दो अलग-अलग किस्म के मामले जुड़े हैं। पर एक साम्य है। वह है सीबीआई की भूमिका।

 पिछले हफ्ते सीबीआई को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सुप्रीम कोर्ट ने की है। उसने सरकार को प्रकारांतर से निर्देश दिया कि जाँच एजेंसी को बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिए कानून बनाया जाए। 

यह काम इस मामले पर अगली सुनवाई यानी 10 जुलाई के पहले-पहले कर लिया जाना चाहिए और इसके लिए संसद की स्वीकृति का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। यानी अध्यादेश जारी करके यह काम किया जा सकता है।

Saturday, May 11, 2013

अगला कौन?

हिन्दू में केशव का कार्टून

15 नवम्बर 2010 ए राजा, टूजी

7 जुलाई 2011 दयानिधि मारन, एयरसेल-मैक्सिस डील

26 जून 2012 वीरभद्र सिंह, कारोबारी सौदों में घूसखोरी

10 मई 2013 पवन कुमार बंसल और अश्विनी कुमार, रेलगेट और कोलगेट


अगला कौन?

सतीश आचार्य का कार्टून

Monday, April 29, 2013

सीबीआई क्या खुद पहल करेगी?

कोल ब्लॉक आबंटन की स्टेटस रिपोर्ट के मसले में कानून मंत्री और सीबीआई डायरेक्टर दोनों ने मर्यादा का उल्लंघन किया है। पर इस वक्त सीबीआई डायरेक्टर चाहें तो एक बड़े बदलाव के सूत्रधार बन सकते हैं। इस मामले में सच क्या है, उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। उन्हें निर्भय होकर सच अदालत और जनता के सामने रखना चाहिए। दूसरे ऐसी परम्परा बननी चाहिए कि भारतीय प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा तथा अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं के अफसरों को सेवानिवृत्ति के बाद कम से कम पाँच साल तक कोई नियुक्ति न मिले। भले ही इसके बदले उन्हें विशेष भत्ता दिया जाए। इससे अफसरों के मन में लोभ-लालच नहीं रहेगा। सत्ता का गलियारा बेहद पेचीदा है। यहाँ के सच उतने सरल नहीं हैं, जितने हम समझते हैं। बहरहाल काफी बातें अदालत के सामने साफ होंगी। रंजीत सिन्हा के हलफनामे में जो नहीं कहा गया है वह सामने आना चाहिएः-
कुछ बातें जो अभी तक विस्मित नहीं करती थीं, शायद वे अब विस्मित करें। कोयला मामले में सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा के अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि मामले की स्टेटस रिपोर्ट का ड्राफ्ट कानून मंत्री को दिखाया गया, जिसकी उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी। सीबीआई ने अपनी रपट 8 मार्च को दाखिल की थी। उसके बाद 12 मार्च को अटॉर्नी जनरल जीई वाहनावती ने अदालत से कहा कि हमने इस रपट को देखा नहीं था। इसके बाद अदालत ने सीबीआई के डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वे हलफनामा देकर बताएं कि यह रिपोर्ट सरकार को दिखाई गई या नहीं। अदालत ने ऐसा निर्देश क्यों दिया? इसके बाद 13 अप्रेल के अंक में इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी कि सीबीआई डायरेक्टर अदालत में दाखिल होने वाले हलफनामे में इस बात को स्वीकार करेंगे कि रपट सरकार को दिखाई गई थी।